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प्रेस विज्ञप्ति | 01 फरवरी, 2019 | प्रथम दलित साहित्य महोत्सव के आयोजन पूर्व प्रेस वार्ता से

प्रेस विज्ञप्ति | 01 फरवरी, 2019 | प्रथम दलित साहित्य महोत्सव

दलित साहित्य महोत्सव दलित-आदिवासी और वंचित अस्मिताओं के लेखन और संस्कृतियों को समाज के सामने लाने का बनेगा एक माध्यम; साहित्य,संस्कृति और जन आन्दोलनों को जोड़ने की होगी कोशिश

देश भर से दलित-आदिवासी, महिला, घुमंतू आदिवासी समुदाय, अल्पसंख्यक व कई अन्य वंचित समुदायों से करीबन 15 भाषाओं के लेखक, संस्कृतिकर्मी, गायक, नाट्यकार, कलाकार हो रहे हैं शामिल

नई दिल्ली | 01 फरवरी 2019 : आज दिल्ली यूनिवर्सिटी, नार्थ कैम्पस के यूनिवर्सिटी गेस्ट हाउस में आयोजित प्रेस कोंफ्रेस में दिल्ली यूनिवर्सिटी के किरोड़ीमल कॉलेज में होने वाले प्रथम दलित साहित्य महोत्सव, जो 3-4 फरवरी को होने वाली है, के बाबत जानकारी दी गयी। प्रेस वार्ता संबोधित करते हुए दलित साहित्य महोत्सव के संयोजक डॉ नामदेव ने कहा कि दलित साहित्य महोत्सव का मुख्य उद्देश्य भारत में दलित-आदिवासी और वंचित अस्मिताओं के लेखन, साहित्य, और संस्कृति को समाज के सामने लाना है।क्यूंकि इन साहित्यों के माध्यम से ही भारत के वंचित समुदाय की समस्याओं को सामने लाया जा सकता है। इसीलिए इस बार के महोत्सव का मूल थीम हमने ‘दलित’ शब्द रखा है।

दलित साहित्य महोत्सव के संस्थापक और आदिवासी-दलित कथाकार सूरज बडत्या ने कहा कि आज जानबूझकर ‘दलित’ शब्द, जो वंचित समुदायों पर किये दमन और उनकी पीड़ा, वेदना की परिचायक रही है, उस पर हमले हों रहे हैं। चाहें प्रगतिशील हो या प्रतिक्रियावादी सभी को इस शब्द से परेशानी हो रही है। शायद ही कोई लेखक या साहित्य संगठन दलित-आदिवासी व वंचित समुदायों के लेखन के प्रति सकारात्मक सोच रखते हैं इसीलिए अम्बेडकरवादी लेखक संघ और सहयोगी संगठनों के साथ मिलकर हमने इसकी योजना बनाई।

महोत्सव के सचिवालय सचिव संजीव डांडा ने कहा कि इस महोत्सव के लिए भारत की विभिन्न भाषाओं के दलित-आदिवासी, महिला, घुमंतू आदिवासी, अल्पसंख्यक और हिजड़ा समुदाय के साहित्यकारों से संपर्क किया गया है। जिनमें से करीबन 15 भाषाओं के लेखक, संस्कृतिकर्मी, गायक, नाटककार, कलाकार शामिल होंगे। नेपाल की प्रमुख दलित लेखक आहुति विशेष रूप से इसमें आएँगी। साथ ही नर्मदा बचाओ आन्दोलन और जन आंदोलनों का राष्ट्रीय समन्वय (एनएपीएम) की नेत्री मेधा पाटकर भी इस महोत्सव में शामिल होंगी। महाराष्ट्र के साहित्य अकादमी द्वारा पुरस्कृत आदिवासी लेखक लक्ष्मण गायकवाड, दलित लेखक शरणकुमार लिम्बाले, गुजरात से हरीश मंगलम और आदिवासी कवि-गायक गोवर्धन बंजारा, विश्व प्रसिद्द कलाकार मनमोहन बावा, कन्नड़ भाषा के महत्वपूर्ण आदिवासी लेखक शान्था नाइक, हैदराबाद से वी.कृष्णा, त्रिवेंद्रम से जया श्री, शामल मुस्तफा खान, पंजाबी भाषा के साहित्य अकादमी पुरस्कृत लेखक बलबीर माधोपुरी, क्रान्तिपाल, मदन वीरा, मोहन त्यागी और कई अन्य इस महोत्सव में शामिल हो रहे हैं। हिंदी लेखकों में शामिल होने वालों में मोहनदास नैमिशराय, जयप्रकाश कर्दम, ममता कालिया, चौथीराम यादव, हरिराम मीणा, श्योराज सिंह बेचैन, निर्मला पुतुल, बल्ली सिंह चीमा व कई अन्य हैं। भोजपुरी भाषा से बिहार से मुसाफिर बैठा, प्रहलादचाँद दास। भोपाल से असंगघोष। लखनऊ से मंतव्य पत्रिका के संपादक और ज्ञानपीठ से पुरस्कृत कथाकार कवि हरेप्रकाश उपाध्याय। आगरा से सुनों ब्राह्मण जैसी कालजयी रचनाकार के लेखक मलखान सिंह होंगे।

दिल्ली यूनिवर्सिटी के अकादमिक समिति के सदस्य व रिदम के निदेशक प्रो. हंसराज सुमन ने बताया कि इस लिटरेचर फेस्टिवल की मुख्य बात इसमें महाराष्ट्र, राजस्थान, तमिलनाडु और गुजरात से आने वाले लोकगायक रहेंगे जो दलित-आदिवासी परम्परा और संस्कृति से लोगों को रूबरू करायेंगे। प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए आंबेडकरवादी लेखक संघ (अलेस) के अध्यक्ष बलराज सिंहमार ने कहा कि हमलोग विगत दो साल से इस फेस्टिवल की योजना बना रहे थे जो कई समस्याओं से झूझने और साहस और सहयोग जुटा पाने के बाद अब होने वाली है। इग्नू के प्रोफेसर प्रमोद मेहरा ने कहा कि महोत्सव में छः सत्र समानांतर रूप से चलेंगे। इसमें एक सत्र अंग्रेजी भाषा का और एक सत्र विभिन्न भारतीय भाषाओं का भी होगा। इसके अलावा दलित-आदिवासी स्त्री और अल्पसंख्यक समुदाय पर बनी डॉक्युमेंट्री फिल्मों को भी दोनों दिन दिखाया जाएगा। उन्होंने आगे बताया कि इस दलित साहित्य महोत्सव के माध्यम से हम समाज को सामाजिक न्याय, समता और प्यार का एक व्यापक सन्देश देना चाहते जो कि जातिव्यवस्था को मिटाने में सहायक होगा।

दिल्ली यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर और स्त्रीवादी चिन्तक डॉ हेमलता कुमार ने कहा कि आज कोर्पोरेट घरानों ने साहित्य को कब्जाने की मुहीम चला रखी है। पुरुषवादी संस्कार, समाज और साहित्य में हावी हों रहें हैं। ऐसे पुरुषवादी समाज में स्त्रियाँ भी दलित की श्रेणी में ही आती हैं। इसलिए ये महोत्सव एक ऐतिहासिक भूमिका निभाएगा। जामिया के प्रोफेसर और दलित चिन्तक मुकेश मिरोठा ने कहा कि इस कार्यक्रम के उदघाटन सत्र में आन्दोलनकर्मी मेधा पाटकर, नेपाल से आयी दलित लेखक आहुति और मेगसेसे पुरस्कृत आन्दोलनकर्मी बैज्वाड़ा विलसन भी मौजूद रहेंगे। यह दलित साहित्य महोत्सव भारत में अपने ढंग का एक अनूठा प्रयास होगा। हम सभी से आग्रह करते हैं कि 3-4 फरवरी 2019 को दिल्ली विश्वविद्यालय के किरोड़ीमल कॉलेज में होने वाले प्रथम दलित साहित्य महोत्सव में शामिल हों और इसे सफल बनाने में सहभाग करें।

आयोजक संगठन : अम्बेडकरवादी लेखक संघ, हिंदी विभाग, किरोड़ीमल कॉलेज, रश्मि प्रकाशन, लखनऊ, रिदम पत्रिका, जन आंदोलनों का राष्ट्रीय समन्वय (एनएपीएम), दिल्ली समर्थक समूह, अलग दुनिया, मंतव्य पत्रिका, अक्षर प्रकाशन और वितरक, दिल्ली, फोरम फॉर डेमोक्रेसी, मगध फाउंडेशन, कहानी पंजाब, अम्बेडकर वर्ल्ड ।

ज्यादा जानकारी के लिए 9810526252, 9891438166, 9999093364, 9958797409 पर संपर्क करें या dalitlitfest@gmail.com पर ईमेल करें ।

Posted in Press Release

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